Kidney Disease in Youth: कम उम्र में क्यों बढ़ रही किडनी की बीमारी? जानिए नेफ्रोलॉजी एक्सपर्ट से इसके कारण और बचाव
05/26/2026
पहले किडनी की बीमारी (Kidney Disease) को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन आज का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अब 25 से 40 साल के युवाओं में भी किडनी फेलियर (Kidney Failure in Youth) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें महज थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
नेफ्रोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. निशा गौर ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि आज की खराब जीवनशैली, तनाव और गलत खानपान कम उम्र में किडनी खराब होने की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं।
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किडनी खराब होने की मुख्य वजहें: डॉ. निशा गौर ने बताया किन आदतों से बढ़ रहा खतरा
डॉ. निशा गौर बताती हैं कि किडनी का मुख्य काम शरीर से गंदगी (Toxins) और अतिरिक्त पानी को छानकर बाहर निकालना है। लेकिन जब हमारी रोजमर्रा की आदतें बिगड़ती हैं, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने लगता है।
युवाओं में किडनी की बीमारी बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- दर्द की दवाओं (Painkillers) का ज्यादा इस्तेमाल: आजकल सिरदर्द, बदन दर्द या हल्की सी परेशानी होने पर लोग बिना सोचे-समझे तुरंत पेनकिलर खा लेते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक ओवर-द-काउंटर (OTC) दर्द निवारक दवाएं लेना किडनी को पूरी तरह डैमेज कर सकता है।
- हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज: अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सीधे किडनी की ब्लड वेसल्स (धमनियों) को नुकसान पहुंचाते हैं।
- खराब खानपान और पैकेट बंद फूड्स: भोजन में बहुत ज्यादा नमक, प्रिजर्वेटिव्स वाले पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, और ठंडे-मीठे कार्बोनेटेड पेय (Soft Drinks) का सेवन।
- कम पानी पीना: दिनभर में पर्याप्त पानी न पीने से किडनी टॉक्सिंस को सही तरीके से फ्लश आउट नहीं कर पाती।
- लाइफस्टाइल और तनाव: देर रात तक जागना, शारीरिक निष्क्रियता (Lack of Exercise) और लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव।

सालों तक चुपचाप बढ़ती है बीमारी: इन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
किडनी की बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है; इसके लक्षण तब तक खुलकर सामने नहीं आते जब तक किडनी काफी हद तक खराब नहीं हो चुकी होती।
डॉ. निशा गौर के अनुसार, सिर्फ पेशाब में दिक्कत होना ही किडनी की बीमारी का संकेत नहीं है। आपका शरीर ये दूसरे संकेत भी देता है:
- लगातार थकान और कमजोरी रहना (खून की कमी या टॉक्सिंस जमा होने के कारण)
- पैर, टखनों (Ankles) और चेहरे पर सूजन आना (शरीर में फ्लूइड जमा होने की वजह से)
- भूख कम लगना या अचानक वजन कम होना
- जी मिचलाना, उल्टी होना या सुबह के वक्त चक्कर आना
- सांस फूलना (फेफड़ों में पानी जमा होने या गंभीर एनीमिया के कारण)
- त्वचा में सूखापन और अत्यधिक खुजली होना
- पेशाब में बदलाव आना (बार-बार पेशाब आना, झाग बनना या रंग गहरा होना)
नोट: अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, तो इसे सामान्य कमजोरी न समझें, तुरंत किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) करवाएं।
घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत: किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय (Kidney Failure Prevention Tips)
डॉ. निशा गौर कहती हैं कि "किडनी की बीमारी का पता चलना जिंदगी का खत्म होना नहीं है।" अगर सही समय पर बीमारी डायग्नोस हो जाए, तो इसे सही इलाज, संतुलित खानपान और सतर्कता से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
एक्सपर्ट की महत्वपूर्ण सलाह:
- सालाना रूटीन चेकअप: जिन लोगों को मधुमेह (Diabetes), हाई ब्लड प्रेशर या मोटापे की समस्या है, उन्हें साल में कम से कम एक बार किडनी की जांच (KFT और यूरिन टेस्ट) जरूर करानी चाहिए।
- ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल: अपनी दवाओं को समय पर लें ताकि बीपी और शुगर का स्तर सामान्य बना रहे।
- कम नमक और पर्याप्त पानी: भोजन में ऊपर से नमक डालने से बचें और दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
- सेल्फ-मेडिकेशन बंद करें: बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के कोई भी एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवा न लें।
- नियमित व्यायाम: रोजाना 30 मिनट वॉक, योग या एक्सरसाइज करें ताकि शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: युवाओं में किडनी की बीमारी के मुख्य कारण क्या हैं?
A: खराब खानपान, अत्यधिक पेनकिलर्स का सेवन, कम पानी पीना, अनियंत्रित हाई बीपी, डायबिटीज और अत्यधिक मानसिक तनाव इसके मुख्य कारण हैं।
Q2: किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं जिन्हें लोग पहचान नहीं पाते?
A: शुरुआती लक्षणों में चेहरे और पैरों पर हल्की सूजन, हर वक्त बिना वजह थकान रहना, भूख न लगना और जी मिचलाना शामिल हैं, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं।
Q3: क्या शुरुआती चरण में किडनी की बीमारी ठीक हो सकती है?
A: हाँ, यदि शुरुआती स्टेज में ही बीमारी का पता चल जाए, तो सही नेफ्रोलॉजिस्ट के मार्गदर्शन में डाइट कंट्रोल, दवाओं और अनुशासित जीवनशैली से किडनी को आगे डैमेज होने से पूरी तरह बचाया जा सकता है।
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